Poorn Samarpan
02/20/2017 at 10:12. Facebook
आयुक्तः प्राकृतः स्तब्धः शठोनैष्कृतिकोऽलसः ।विषादी दीर्घसूत्री च कर्ता तामस उच्यते॥ भावार्थ : जो कर्ता अयुक्त, शिक्षा से रहित घमंडी, धूर्त और दूसरों की जीविका का नाश करने वाला तथा शोक करने वाला, आलसी और दीर्घसूत्री (दीर्घसूत्री उसको कहा जाता है कि जो थोड़े काल में होने लायक साधारण कार्य को भी फिर कर...

Bhagavad Gita : अध्याय 18 का श्लोक 28 | Poornsamarpan.in

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02/18/2017 at 09:36. Facebook
बलराम ने यही सवाल पूछा था, जब उन्हें मथुरा छोड़ना पड़ा था और वे मुश्किलों के दौर से गुजर रहे थे। उन्हें जंगल में भटकना पड़ रहा था और उनके पास पर्याप्त खाना और आराम का वक्त भी नहीं था। ‘हमारे साथ ये सब क्यों हो रहा है, वह भी तुम्हारे होते हुए?’ कृष्ण ने जवाब दिया, ‘जब जीवन आपके साथ बहुत अच्छी तरह घटि...

आध्यात्मिक पथ पर चलने वालों को बहुत ज्यादा मुश्किलों का सामना क्यों करना पड़ता है? आइये जानें कि

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02/18/2017 at 03:40. Facebook
"बिहारी जी की कृपा" :rose::rose: नाम था गोवर्धन ! "गोवर्धन" एक ग्वाला था, बचपन से दूसरों पे आश्रित, क्योंकि उसका कोई नहीं था, जिस गाँव में रहता, वहां की लोगो की गायें आदि चरा कर जो मिलता, उसी से अपना जीवन चलाता,पर गाँव के सभी लोग उस से बहुत प्यार करते थे ! . एक दिन गाँव की एक महिला, जिसे वह काकी कहत...

"बिहारी जी की कृपा" | Poornsamarpan.in

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02/18/2017 at 03:15. Facebook
मुक्तसङ्‍गोऽनहंवादी धृत्युत्साहसमन्वितः ।सिद्धयसिद्धयोर्निर्विकारः कर्ता सात्त्विक उच्यते॥ भावार्थ : जो कर्ता संगरहित, अहंकार के वचन न बोलने वाला, धैर्य और उत्साह से युक्त तथा कार्य के सिद्ध होने और न होने में हर्ष -शोकादि विकारों से रहित है- वह सात्त्विक कहा जाता है ॥26॥ The worker who is free fr...

Bhagavad Gita : अध्याय 18 का श्लोक 26

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02/15/2017 at 03:17. Facebook
अनुबन्धं क्षयं हिंसामनवेक्ष्य च पौरुषम्‌ ।मोहादारभ्यते कर्म यत्तत्तामसमुच्यते॥ भावार्थ : जो कर्म परिणाम, हानि, हिंसा और सामर्थ्य को न विचारकर केवल अज्ञान से आरंभ किया जाता है, वह तामस कहा जाता है ॥25॥ And that action performed in ignorance and delusion without consideration of future bondage or cons...

Bhagavad Gita : अध्याय 18 का श्लोक 25

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02/15/2017 at 03:16. Facebook
Auntie’s Cancer Cancelled April 25, 2010 Meanwhile I was translating (Lord Nrsimhadeva’s Pastimes into Spanish) I got a call from my family in New Zealand telling me that my auntie had an agressive cancer, and most probably only a few more weeks to live.

Narsimhalila :Auntie’s Cancer Cancelled

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02/14/2017 at 10:52. Facebook
यत्तु कामेप्सुना कर्म साहङ्‍कारेण वा पुनः।क्रियते बहुलायासं तद्राजसमुदाहृतम्‌॥ भावार्थ : परन्तु जो कर्म बहुत परिश्रम से युक्त होता है तथा भोगों को चाहने वाले पुरुष द्वारा या अहंकारयुक्त पुरुष द्वारा किया जाता है, वह कर्म राजस कहा गया है ॥24॥ But action performed with great effort by one seeking to g...

Bhagavad Gita : अध्याय 18 का श्लोक 24 | Poornsamarpan.in

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02/14/2017 at 10:37. Facebook
एक बार एक बहुत ही पहुंचे हुए संत महात्मा बीमार हो गए, काफी वेध हकीम उनके इलाज कर चुके पर उनको आराम नही हुआ ।* *उनके एक बहुत ही प्रिय शिष्य तो उनके चरणो में हताश हो कर बैठ गया । महात्मा ने उसकी और प्रेम से देखा और कहा निराशा न हो पुत्र सब ठीक हो जायेगा ।* *लेकिन वो शिष्य बोला प्रभु आप तो सर्व शक्तिमा...

निष्काम भक्ति | Poornsamarpan.in

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नियतं सङ्‍गरहितमरागद्वेषतः कृतम।अफलप्रेप्सुना कर्म यत्तत्सात्त्विकमुच्यते॥ भावार्थ : जो कर्म शास्त्रविधि से नियत किया हुआ और कर्तापन के अभिमान से रहित हो तथा फल न चाहने वाले पुरुष द्वारा बिना राग-द्वेष के किया गया हो- वह सात्त्विक कहा जाता है ॥23॥ As for actions, that action in accordance with duty,...

Bhagavad Gita : अध्याय 18 का श्लोक 23 | Poornsamarpan.in

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श्रीराम: शरणम ।। *भजन* संसार के लोगों से आशा ना किया करना, जब कोई ना हो अपना, श्री राम कहा करना। राम राम राम राम जीवन के समुन्दर में, तूफ़ान भी आतें हैं, जो हरि को भजतें हैं, हरि आप बचाते हैं वो आप ही आएंगे, बस याद किया करना, जब साथ ना दे कोई, श्री राम जपा करना यह सोच अरे बन्दे, प्रभु तुझ से दूर नहीं...

श्रीराम: शरणम ।।

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As we learn more about the bhakti, the three criteria of ananyata, nishkamta, and nirantar keep cropping up repeatedly. Clearly, they are very important if we are to perfect our love for Krishna so let’s try to understand them in detail starting with ananya bhakti. Ananya bhakti was mentioned in one...

What is Ananya Bhakti? | Poornsamarpan.in

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यत्तु कृत्स्नवदेकस्मिन्कार्ये सक्तमहैतुकम्‌।अतत्त्वार्थवदल्पंच तत्तामसमुदाहृतम्‌॥ भावार्थ : परन्तु जो ज्ञान एक कार्यरूप शरीर में ही सम्पूर्ण के सदृश आसक्त है तथा जो बिना युक्तिवाला, तात्त्विक अर्थ से रहित और तुच्छ है- वह तामस कहा गया है ॥22॥ And that knowledge by which one is attached to one kind of...

Bhagavad Gita : अध्याय 18 का श्लोक 22 | Poornsamarpan.in

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पृथक्त्वेन तु यज्ज्ञानं नानाभावान्पृथग्विधान्‌ ।वेत्ति सर्वेषु भूतेषु तज्ज्ञानं विद्धि राजसम्‌ ॥ भावार्थ : किन्तु जो ज्ञान अर्थात जिस ज्ञान के द्वारा मनुष्य सम्पूर्ण भूतों में भिन्न-भिन्न प्रकार के नाना भावों को अलग-अलग जानता है, उस ज्ञान को तू राजस जान ॥21॥ That knowledge by which a different type…

Bhagavad Gita : अध्याय 18 का श्लोक 21

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भक्त रघु केवट . महातीर्थ श्री जगन्नाथ पुरी के समीप एक ग्राम पिपलीचटी था । इसी ग्राम में रघु केवट नाम का मछुवारा रहता था , पत्नी तथा वृद्धा माता थीं । परिवार छोटा अवश्य था परंतु गरीबी से परिपूर्ण था दारिद्र जीवन-यापन हो रहा था । . रघु केवट पूर्वजन्म के संस्कारों से सहृदय था वह जीवन यापन के लिए मछली प...

भक्त रघु केवट

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बाँके बिहारी जी का प्रेम . एक बार मैं ट्रेन से आ रहा था मेरी साथ वाली सीट पे एक वृद्ध औरत बैठी थी जो लगातार रो रही थी... . मैंने बार बार पूछा मईया क्या हुआ, मईया क्या हुआ ... . बड़ी मिनतो के बाद मईया ने एक लिफाफा मेरे हाथ मे रख दिया... . मैंने लिफाफा खोल कर देखा उसमे चार पेड़े, 200 रूपये और इत्र से…

बाँके बिहारी जी का प्रेम | Poornsamarpan.in

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सर्वभूतेषु येनैकं भावमव्ययमीक्षते ।अविभक्तं विभक्तेषु तज्ज्ञानं विद्धि सात्त्विकम् ॥ भावार्थ : जिस ज्ञान से मनुष्य पृथक-पृथक सब भूतों में एक अविनाशी परमात्मभाव को विभागरहित समभाव से स्थित देखता है, उस ज्ञान को तू सात्त्विक जान ॥20॥ That knowledge by which one undivided spiritual nature is seen in al...

Bhagavad Gita : अध्याय 18 का श्लोक 20 | Poornsamarpan.in

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ज्ञानं कर्म च कर्ता च त्रिधैव गुणभेदतः ।प्रोच्यते गुणसङ्ख्याने यथावच्छ्णु तान्यपि ॥ भावार्थ : गुणों की संख्या करने वाले शास्त्र में ज्ञान और कर्म तथा कर्ता गुणों के भेद से तीन-तीन प्रकार के ही कहे गए हैं, उनको भी तु मुझसे भलीभाँति सुन ॥19॥ In accordance with the three modes of material nature, there...

Bhagavad Gita : अध्याय 18 का श्लोक 19 | Poornsamarpan.in

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Pankaj, a youth who once lived In Mathura, almost every other day approached a sadhu (a holy person,) and requested, "Babaji, can you please teach me a prayer, which will bestow peace when I meditate?" After many such requests, the sadhu one day said, "My child, this is the most sacred and purifying...

Hare "Krishna Hare Krishna, Krishna Krishna Hare Hare,Hare Ram Hare Ram, Ram Ram Hare Hare"

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