Poorn Samarpan
Poorn Samarpan
05/27/2017 at 03:09. Facebook
Question: It is said that God is present everywhere. But I don’t perceive his presence anywhere. Can you explain?
Poorn Samarpan 05/27/2017

Radhanath Swami - How to Connect to The Divine

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Poorn Samarpan
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05/27/2017 at 03:08. Facebook
इदं ते नातपस्काय नाभक्ताय कदाचन ।न चाशुश्रूषवे वाच्यं न च मां योऽभ्यसूयति ॥ भावार्थ : तुझे यह गीत रूप रहस्यमय उपदेश किसी भी काल में न तो तपरहित मनुष्य से कहना चाहिए, न भक्ति-(वेद, शास्त्र और परमेश्वर तथा महात्मा और गुरुजनों में श्रद्धा, प्रेम और पूज्य भाव का नाम 'भक्ति' है।)-रहित से और न बिना सुनने…
Poorn Samarpan 05/27/2017

Bhagavad Gita : अध्याय 18 का श्लोक 67

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Poorn Samarpan
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yesterday at 10:07. Facebook
śrī bhagavān uvāca idaṁ tu te guhyatamaṁ pravakṣyāmy anasūyave jñānaṁ vijñāna-sahitaṁ yaj jñātvā mokṣyase 'śubhāt "The Supreme Lord said: My dear Arjuna, because you are never envious of Me, I shall impart to you this most secret wisdom, knowing which you shall be relieved of the miseries of materia...
Poorn Samarpan 05/26/2017

Rāja-Vidyā: The King of Knowledge

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Amit Sharma
Chandu Rajput Saksham
Devendar Singh
Poorn Samarpan
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05/25/2017 at 05:50. Facebook
Question: I have heard that Bhakti Yoga helps us to give up bad habits. But how exactly does it work?Radhanath Swami: My dear god brother, Shyamsundar, he is an example of how bhakti can transform a heart, to help us give up very difficult habits.
Poorn Samarpan 05/25/2017

Radhanath Swami - How to Give up Bad Habits

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Poorn Samarpan
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05/25/2017 at 05:11. Facebook
सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज ।अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः ॥ भावार्थ : संपूर्ण धर्मों को अर्थात संपूर्ण कर्तव्य कर्मों को मुझमें त्यागकर तू केवल एक मुझ सर्वशक्तिमान, सर्वाधार परमेश्वर की ही शरण (इसी अध्याय के श्लोक 62 की टिप्पणी में शरण का भाव देखना चाहिए।) में आ जा। मैं तुझे...
Poorn Samarpan 05/25/2017

Bhagavad Gita : अध्याय 18 का श्लोक 66

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Devendar Singh
Poorn Samarpan
Poorn Samarpan
05/24/2017 at 09:28. Facebook
मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु ।मामेवैष्यसि सत्यं ते प्रतिजाने प्रियोऽसि मे ॥ भावार्थ : हे अर्जुन! तू मुझमें मनवाला हो, मेरा भक्त बन, मेरा पूजन करने वाला हो और मुझको प्रणाम कर। ऐसा करने से तू मुझे ही प्राप्त होगा, यह मैं तुझसे सत्य प्रतिज्ञा करता हूँ क्योंकि तू मेरा अत्यंत प्रिय है ॥65॥ A...
Poorn Samarpan 05/24/2017

Bhagavad Gita : अध्याय 18 का श्लोक 65

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Pallav Mookherjee
Navin Sharma
Chandu Rajput Saksham
सर्वगुह्यतमं भूतः श्रृणु मे परमं वचः ।इष्टोऽसि मे दृढमिति ततो वक्ष्यामि ते हितम्‌ ॥ भावार्थ : संपूर्ण गोपनीयों से अति गोपनीय मेरे परम रहस्ययुक्त वचन को तू फिर भी सुन। तू मेरा अतिशय प्रिय है, इससे यह परम हितकारक वचन मैं तुझसे कहूँगा ॥64॥ Because you are My very dear friend, I am speaking to you the...
Poorn Samarpan 05/18/2017

Bhagavad Gita : अध्याय 18 का श्लोक 64 | Poornsamarpan.in

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इति ते ज्ञानमाख्यातं गुह्याद्‍गुह्यतरं मया ।विमृश्यैतदशेषेण यथेच्छसि तथा कुरु ॥ भावार्थ : इस प्रकार यह गोपनीय से भी अति गोपनीय ज्ञान मैंने तुमसे कह दिया। अब तू इस रहस्ययुक्त ज्ञान को पूर्णतया भलीभाँति विचार कर, जैसे चाहता है वैसे ही कर ॥63॥ Thus I have explained to you the most confidential of all...
Poorn Samarpan 05/15/2017

Bhagavad Gita : अध्याय 18 का श्लोक 63

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Pankaj Dod
तमेव शरणं गच्छ सर्वभावेन भारत।तत्प्रसादात्परां शान्तिं स्थानं प्राप्स्यसि शाश्वतम्‌॥
Poorn Samarpan 05/11/2017

Bhagavad Gita : अध्याय 18 का श्लोक 62 | Poornsamarpan.in

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Om Chawala
Anil Arora
Vijay Anchalia
Ahobilam (Ahobalam) is the place where Supreme Personality of Godhead incarnated Himself as Lord Nrsimhadeva to killed the demon Hiranyakasipu and save His dear-most devotee Prahlada. Here at Ahobilam, Lord Nrsimhadeva emerged from the pillar of Hiranyakasipu’s palace, killed him after a fierce figh...
Poorn Samarpan 05/08/2017

Sri Ahobilam – Where Lord Nrsimhadeva Appeared | Poornsamarpan.in

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Anuj Karn
Dabral Dev
Naresh Kumar Bammidi
ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशेऽजुर्न तिष्ठति।भ्रामयन्सर्वभूतानि यन्त्रारुढानि मायया॥ भावार्थ : हे अर्जुन! शरीर रूप यंत्र में आरूढ़ हुए संपूर्ण प्राणियों को अन्तर्यामी परमेश्वर अपनी माया से उनके कर्मों के अनुसार भ्रमण कराता हुआ सब प्राणियों के हृदय में स्थित है ॥61॥ The Supreme Lord is situated in every...
Poorn Samarpan 05/08/2017

Bhagavad Gita : अध्याय 18 का श्लोक 61

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Chandu Rajput Saksham
Mohini Ekadasi Sri Yudhisthira Maharaja said, "Oh Janardana, what is the name of the Ekadasi that occurs during the light fortnight (sukla paksha) of the month of Vaisakha (April-May) ? What is the process for observing it properly? Kindly narrate all of these details to me. The Supreme Personality…
Poorn Samarpan 05/06/2017

Mohini Ekadasi , Saturday 6th May 2017 | Poornsamarpan.in

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Satnam Singh
Vatan Chauhan
Threnetra Nath
स्वभावजेन कौन्तेय निबद्धः स्वेन कर्मणा ।कर्तुं नेच्छसि यन्मोहात्करिष्यस्यवशोऽपि तत्‌ ॥ भावार्थ : हे कुन्तीपुत्र! जिस कर्म को तू मोह के कारण करना नहीं चाहता, उसको भी अपने पूर्वकृत स्वाभाविक कर्म से बँधा हुआ परवश होकर करेगा ॥60॥ Under illusion you are now declining to act according to My direction.…
Poorn Samarpan 05/06/2017

Bhagavad Gita : अध्याय 18 का श्लोक 60 | Poornsamarpan.in

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Abhishek Sawant
Chiara Luciani
Ankit Paul
Srimad-Bhagavatam (Bhagavata Purana) – Canto 2: The Cosmic Manifestation – SB 2.9: Answers by Citing the Lord’s Version
Poorn Samarpan 05/04/2017

I Myself exist within everything created, and at the same time I am outside of everything | Poornsamarpan.in

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यदहङ्‍कारमाश्रित्य न योत्स्य इति मन्यसे ।मिथ्यैष व्यवसायस्ते प्रकृतिस्त्वां नियोक्ष्यति ॥ भावार्थ : जो तू अहंकार का आश्रय लेकर यह मान रहा है कि 'मैं युद्ध नहीं करूँगा' तो तेरा यह निश्चय मिथ्या है, क्योंकि तेरा स्वभाव तुझे जबर्दस्ती युद्ध में लगा देगा ॥59॥ If you do not act according to My directio...
Poorn Samarpan 05/04/2017

Bhagavad Gita : अध्याय 18 का श्लोक 59

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Nikhil Pandey
Vatan Chauhan
Raj Jyotish
Srimad-Bhagavatam (Bhagavata Purana) – Canto 2: The Cosmic Manifestation – SB 2.9: Answers by Citing the Lord’s Version SB 2.9.36
Poorn Samarpan 05/03/2017

Unfolding the mystery of bhakti-yoga

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Swati Saxena
Shachinath Mahato
Veena Shukla
मच्चित्तः सर्वदुर्गाणि मत्प्रसादात्तरिष्यसि।अथ चेत्वमहाङ्‍कारान्न श्रोष्यसि विनङ्क्ष्यसि॥ भावार्थ : उपर्युक्त प्रकार से मुझमें चित्तवाला होकर तू मेरी कृपा से समस्त संकटों को अनायास ही पार कर जाएगा और यदि अहंकार के कारण मेरे वचनों को न सुनेगा तो नष्ट हो जाएगा अर्थात परमार्थ से भ्रष्ट हो जाएगा ॥58॥ …
Poorn Samarpan 05/03/2017

Bhagavad Gita : अध्याय 18 का श्लोक 58

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Ankita Das
Vatan Chauhan
From Back to GodheadBy Upendra Dasa
Poorn Samarpan 05/02/2017

True Happiness Must be Eternal

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Swathi Goud
चेतसा सर्वकर्माणि मयि सन्न्यस्य मत्परः।बुद्धियोगमुपाश्रित्य मच्चित्तः सततं भव॥ भावार्थ : सब कर्मों को मन से मुझमें अर्पण करके (गीता अध्याय 9 श्लोक 27 में जिसकी विधि कही है) तथा समबुद्धि रूप योग को अवलंबन करके मेरे परायण और निरंतर मुझमें चित्तवाला हो ॥57॥ In all activities just depend upon Me and wor...
Poorn Samarpan 05/02/2017

Bhagavad Gita : अध्याय 18 का श्लोक 57

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Sukumar Debroy
Vatan Chauhan
Pankaj Patidar