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yesterday at 08:01. Facebook
Butter Thief of Vrindavan It was that time of the day when the sun was finally getting ready to retire for the day, after serving Krishna and his cowherd friends. The horizon turned crimson and the air in Vrindavan was filled with the chirping sounds of birds, returning to their nests.

Butter Thief of Vrindavan

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yesterday at 05:19. Facebook
न हि देहभृता शक्यं त्यक्तुं कर्माण्यशेषतः ।यस्तु कर्मफलत्यागी स त्यागीत्यभिधीयते ॥ भावार्थ : क्योंकि शरीरधारी किसी भी मनुष्य द्वारा सम्पूर्णता से सब कर्मों का त्याग किया जाना शक्य नहीं है, इसलिए जो कर्मफल त्यागी है, वही त्यागी है- यह कहा जाता है ॥11॥ It is indeed impossible for an embodied being to…

Bhagavad Gita : अध्याय 18 का श्लोक 11

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01/21/2017 at 08:59. Facebook
My Friend Krishna When Shree Krishna descended on the land of Braj more than five thousand years ago, he taught us how to love him and relate to him in many different ways. While Mother Yashoda and the elderly gopis loved him as their child, he was a dear Sakha (friend) to the young gopas (cowherd f...

My Friend Krishna

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01/21/2017 at 08:18. Facebook
न द्वेष्ट्यकुशलं कर्म कुशले नानुषज्जते ।त्यागी सत्त्वसमाविष्टो मेधावी छिन्नसंशयः ॥ भावार्थ : जो मनुष्य अकुशल कर्म से तो द्वेष नहीं करता और कुशल कर्म में आसक्त नहीं होता- वह शुद्ध सत्त्वगुण से युक्त पुरुष संशयरहित, बुद्धिमान और सच्चा त्यागी है ॥10॥ Those who are situated in the mode of goodness, who…

Bhagavad Gita : अध्याय 18 का श्लोक 10

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01/20/2017 at 10:48. Facebook
Mother Yashoda’s Delight During his descension five thousand years ago, Lord Krishna revealed very sweet pastimes to grace his devotees. Amongst all his leelas, his childhood leelas with Mother Yashoda are some of the sweetest and have been sung about repeatedly by rasik saints!

Mother Yashoda’s Delight

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01/20/2017 at 10:37. Facebook
कार्यमित्येव यत्कर्म नियतं क्रियतेअर्जुन ।सङ्‍गं त्यक्त्वा फलं चैव स त्यागः सात्त्विको मतः ॥ भावार्थ : हे अर्जुन! जो शास्त्रविहित कर्म करना कर्तव्य है- इसी भाव से आसक्ति और फल का त्याग करके किया जाता है- वही सात्त्विक त्याग माना गया है ॥9॥ But he who performs his prescribed duty only because it ough...

Bhagavad Gita : अध्याय 18 का श्लोक 9

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01/19/2017 at 06:11. Facebook
हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे। हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे हरे ॥

Hare Krishna....Hari Bol.....

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01/19/2017 at 06:08. Facebook
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01/19/2017 at 05:59. Facebook
दुःखमित्येव यत्कर्म कायक्लेशभयात्त्यजेत्‌ ।स कृत्वा राजसं त्यागं नैव त्यागफलं लभेत्‌ ॥ भावार्थ : जो कुछ कर्म है वह सब दुःखरूप ही है- ऐसा समझकर यदि कोई शारीरिक क्लेश के भय से कर्तव्य-कर्मों का त्याग कर दे, तो वह ऐसा राजस त्याग करके त्याग के फल को किसी प्रकार भी नहीं पाता ॥8॥ Anyone who gives up pre...

Bhagavad Gita : अध्याय 18 का श्लोक 8

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01/19/2017 at 05:53. Facebook
*गुरु नानक के बालपन की एक घटना:-*

*गुरु नानक के बालपन की एक घटना:-*

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01/18/2017 at 08:56. Facebook
नियतस्य तु सन्न्यासः कर्मणो नोपपद्यते ।मोहात्तस्य परित्यागस्तामसः परिकीर्तितः ॥ भावार्थ : (निषिद्ध और काम्य कर्मों का तो स्वरूप से त्याग करना उचित ही है) परन्तु नियत कर्म का (इसी अध्याय के श्लोक 48 की टिप्पणी में इसका अर्थ देखना चाहिए।) स्वरूप से त्याग करना उचित नहीं है। इसलिए मोह के कारण उसका त्याग...

Bhagavad Gita : अध्याय 18 का श्लोक 7

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01/18/2017 at 08:55. Facebook
Shree Krishna says in the Gita: समोऽहं सर्वभूतेष्ा न मे द्वेष्योऽस्ति न पि्रयः ॥ “I have neither friend nor enemy.” This was said only to fool others. He does in fact have an enemy, and it is pride. He has a friend too, and that is humility, the opposite of pride. We can enslave God with humilit...

One quality that is dearest to God – Humility

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01/18/2017 at 08:54. Facebook
एतान्यपि तु कर्माणि सङ्‍गं त्यक्त्वा फलानि च ।कर्तव्यानीति में पार्थ निश्चितं मतमुत्तमम्‌ ॥ भावार्थ : इसलिए हे पार्थ! इन यज्ञ, दान और तपरूप कर्मों को तथा और भी सम्पूर्ण कर्तव्यकर्मों को आसक्ति और फलों का त्याग करके अवश्य करना चाहिए, यह मेरा निश्चय किया हुआ उत्तम मत है ॥6॥ All these activities shou...

Bhagavad Gita : अध्याय 18 का श्लोक 6

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01/18/2017 at 08:53. Facebook
यज्ञदानतपःकर्म न त्याज्यं कार्यमेव तत्‌ ।यज्ञो दानं तपश्चैव पावनानि मनीषिणाम्‌ ॥ भावार्थ : यज्ञ, दान और तपरूप कर्म त्याग करने के योग्य नहीं है, बल्कि वह तो अवश्य कर्तव्य है, क्योंकि यज्ञ, दान और तप -ये तीनों ही कर्म बुद्धिमान पुरुषों को (वह मनुष्य बुद्धिमान है, जो फल और आसक्ति को त्याग कर केवल भगवदर...

Bhagavad Gita : अध्याय 18 का श्लोक 5

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निश्चयं श्रृणु में तत्र त्यागे भरतसत्तम ।त्यागो हि पुरुषव्याघ्र त्रिविधः सम्प्रकीर्तितः ॥ भावार्थ : हे पुरुषश्रेष्ठ अर्जुन ! संन्यास और त्याग, इन दोनों में से पहले त्याग के विषय में तू मेरा निश्चय सुन। क्योंकि त्याग सात्विक, राजस और तामस भेद से तीन प्रकार का कहा गया है ॥4॥ O best of the Bhāratas,…

Bhagavad Gita : अध्याय 18 का श्लोक 4

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त्याज्यं दोषवदित्येके कर्म प्राहुर्मनीषिणः ।यज्ञदानतपःकर्म न त्याज्यमिति चापरे ॥ भावार्थ : कई एक विद्वान ऐसा कहते हैं कि कर्ममात्र दोषयुक्त हैं, इसलिए त्यागने के योग्य हैं और दूसरे विद्वान यह कहते हैं कि यज्ञ, दान और तपरूप कर्म त्यागने योग्य नहीं हैं ॥3॥ Some learned men declare that all kinds of…

Bhagavad Gita : अध्याय 18 का श्लोक 3

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Baby Krishna Roop Dhyan Meditation for kids "If every eight year old in the world is taught meditation, we will eliminate violence from the world within one generation" - Dalai Lama 5 BENEFITS OF KIDS MEDITATION

Baby Krishna Roop Dhyan Meditation for kids

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